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Monday, 16 March 2026

लघु उपन्यास : अस्तित्व और साक्षी -भाग – 3अध्याय 14 : नील की चुप्पी

लघु उपन्यास : अस्तित्व और साक्षी -भाग – 3अध्याय 14 : नील की चुप्पी

शाम का समय नदियों के लिए सबसे रहस्यमय होता है।

सूरज धीरे-धीरे पहाड़ियों के पीछे उतर रहा था।

आकाश का रंग सुनहरे से तांबे में बदल रहा था।

नर्मदा का पानी उस रोशनी को पकड़कर चमक रहा था।

अस्तित्व, साक्षी और नील फिर उसी घाट की ओर जा रहे थे। 

दिन भर कस्बे की गलियों में घूमने के बाद भी

तीनों के मन में वही प्रश्न था

प्रवासी शाम को क्या बताएगा?

घाट पर पहुँचते ही उन्होंने देखा

वहाँ अभी कोई नहीं था।

नदी शांत थी।

पीपल के वृक्ष की पत्तियाँ हवा में हल्के से हिल रही थीं।

नील सीढ़ियों पर बैठ गया।

“शायद वह आएगा ही नहीं,” उसने कहा।

साक्षी ने शांत स्वर में कहा

“वह आएगा।”

अस्तित्व ने नदी की ओर देखते हुए पूछा

“तुम्हें इतना विश्वास क्यों है?”

साक्षी ने उत्तर नहीं दिया।

कुछ क्षण की चुप्पी के बाद नील अचानक बोला—

“तुम दोनों को कभी लगता है कि हम यह सब थोड़ा ज़्यादा गंभीरता से ले रहे हैं?”

अस्तित्व ने मुस्कराकर कहा

“तुम्हें नहीं लगता?”

नील ने नदी की ओर देखते हुए कहा

“नदी सुंदर है…

यह जगह भी।

पर इसका मतलब यह नहीं कि यहाँ कोई रहस्य छिपा है।”

साक्षी ने उसकी ओर देखा।

“फिर तुम हमारे साथ यहाँ क्यों आए?”

यह प्रश्न अचानक था।

नील कुछ क्षण चुप रहा।

उसकी आँखें नदी पर टिकी थीं।

फिर उसने धीमे स्वर में कहा

“क्योंकि मैं जानना चाहता था कि तुम्हें यहाँ क्या मिलेगा।”

अस्तित्व ने पूछा

“तुम्हें नहीं?”

नील हल्के से मुस्कराया।

“मुझे… शायद पहले ही मिल चुका है।”

अस्तित्व ने उसकी ओर देखा।

“क्या?”

नील ने कुछ क्षण उत्तर नहीं दिया।

हवा थोड़ी तेज़ हो गई थी।

पीपल की पत्तियाँ अचानक ज़ोर से हिलने लगीं।

और उसी समय घाट की ऊपर वाली सीढ़ियों से कदमों की आहट आई।

तीनों ने मुड़कर देखा।

प्रवासी वापस आ रहा था।

वह धीरे-धीरे सीढ़ियाँ उतर रहा था।

लेकिन इस बार उसकी आँखें सीधे अस्तित्व पर नहीं थीं।

वे नील पर टिकी थीं।

नील अचानक खड़ा हो गया।

उसके चेहरे का रंग बदल गया।

अस्तित्व ने पहली बार देखा

नील की आँखों में आश्चर्य नहीं था।

जैसे…

वह इस व्यक्ति को पहले से जानता हो।

और उसी क्षण प्रवासी ने मुस्कराकर कहा

“तुम आ गए, नील।”

घाट पर अचानक एक गहरी निस्तब्धता छा गई।

अस्तित्व ने धीरे से पूछा

“तुम दोनों… एक-दूसरे को जानते हो?”

नील ने उत्तर नहीं दिया।

प्रवासी ने दिया।

“हाँ,” उसने शांत स्वर में कहा।

“लेकिन कहानी उससे थोड़ी पुरानी है

जितनी तुम सोच रहे हो।”


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,,

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