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Wednesday, 18 March 2026

तुम्हारे डियो की ख़ुशबू में छुपा हुआ दिन

 तुम्हारे डियो की ख़ुशबू में छुपा हुआ दिन

सुबह जब तुम

जल्दी-जल्दी तैयार होकर

दरवाज़े से बाहर निकलती हो,

कमरे में

तुम्हारे डियो की हल्की-सी ख़ुशबू

देर तक ठहरी रहती है।

मैं उसी महक में

थोड़ी देर बैठा रहता हूँ—

जैसे उस ख़ुशबू के भीतर

तुम्हारा पूरा दिन

धीरे-धीरे खुल रहा हो।

मेज़ पर रखी किताब,

खिड़की से आती धूप,

और हवा की हर सरसराहट में

तुम्हारी मौजूदगी का

एक अदृश्य स्पर्श है।

लगता है

तुम चली तो गई हो,

पर तुम्हारे डियो की खुशबू में

तुम्हारा दिन

यहीं कहीं

मेरे पास

छुपा रह गया है।

मुकेश्,,, 

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