“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
अँधेरे की खेती
अँधेरा कोई घटना नहीं।
वह एक फ़सल है
जिसे समय बोता है।
दिन भर की रोशनियाँ
धीरे-धीरे गलती हैं,
स्मृतियों का पानी पड़ता है,
और रात तक
काले फूल उग आते हैं।
चाँद
उनका अकेला माली है।
मुकेश ,,,,,,,
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