“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
देवताओं की भूख
देवताओं को अमृत मिला,
संतोष नहीं।
मनुष्यों को मृत्यु मिली,
फिर भी वे प्रेम करते रहे।
तभी से देवता
मनुष्यों से ईर्ष्या करते हैं।
वे मंदिरों में नहीं,
प्रेमियों की बातचीत में
छिपकर सुनते हैं
कि नश्वरता के भीतर
आख़िर ऐसा क्या है।
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