“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
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Tuesday, 24 July 2012
ये खामोशियाँ
देखना !!! ये खामोशियाँ एक दिन बदल जायेंगी बेचैनियों में और तब तुम कुछ नहीं कह पाओगे और अगर तुम कुछ कह भी पाए तो मै सुन नहीं पाऊंगा शायद तब तक मै डूब चुका होऊंगा मौन के अनंत गह्वर में
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