“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक
▼
Friday, 31 August 2012
हमारी क्या बिसात जो हम लिखे कोई कलाम
हमारी क्या बिसात जो हम लिखे कोई कलाम
ये तो खुदा की कलम है, खुदा के ही अलफ़ाज़
बाकी जो बचा वो हैं अपनों के प्यारे एहसास
मुकेश इलाहाबादी-------------------------------
No comments:
Post a Comment