सांसों के बीच की खाली जगह”
सांसों के बीच
एक खाली-सी जगह होती है
न आवाज़,
न हलचल,
बस एक अनकहा विराम।
उसी विराम में
दिल अपनी थकान छोड़ देता है,
और रूह
अपनी सच्चाई पा लेती है।
यही वह जगह है
जहाँ हम न दुनिया में होते हैं,
न खुद से दूर
बस एक क्षण के लिए
पूरी तरह उपस्थित।
सांसों के बीच की
यही छोटी-सी खामोशी
कभी-कभी
पूरे जीवन का अर्थ बता जाती है।
मुकेश ,,,,,
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