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Wednesday, 25 February 2026

जब लड़कियाँ लौटती हैं अपनी माँ की गोद में...

 "जब लड़कियाँ लौटती हैं अपनी माँ की गोद में..."


जब लड़कियाँ

लौटती हैं

अपनी माँ की गोद में 

तो वे औरतें नहीं होतीं,

फिर से वही बच्चियाँ बन जाती हैं

जो टूटी चूड़ियों के लिए रोया करती थीं

या स्कूल से लौटकर

सीधा उसी आँचल में

अपना दिन रख दिया करती थीं।


वे सारी थकानें

जो उम्र ने जमा की थीं,

माँ की हथेलियों की

बस एक गर्म थपकी से

पिघलने लगती हैं।


जब लड़कियाँ लौटती हैं

अपनी माँ की गोद में,

तो वे अपनी सभी अधूरी दुआओं को

एक बार फिर

माँ की पलकों पर रख आती हैं —

कि शायद अब कबूल हो जाएँ।


वे उस गोद में

कभी अपने पहले प्यार की चोटें रोती हैं,

तो कभी दुनिया की

बिना वजह की नाराज़गियाँ।


उस एक गोद में

वे अपने सारे किरदार उतार देती हैं 

पत्नी, बहू, माँ, प्रेमिका 

और फिर से

सिर्फ़ “बिटिया” बन जाती हैं।


जब लड़कियाँ लौटती हैं

अपनी माँ की गोद में,

तो दरअसल

वे अपने सबसे पुराने घर लौटती हैं 

एक ऐसे घर,

जहाँ सिर्फ़ प्यार किराया होता है

और आँसू

हमेशा माफ़ कर दिए जाते हैं।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,,

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