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Tuesday, 24 February 2026

प्रेम की पीठ पर लिखी उदासी

प्रेम की पीठ पर लिखी उदासी


प्रेम की पीठ पर

किसी पुरानी सुबह की तरह

उदासी लिखी हुई थी—

हल्की, धुँधली, पर गहरी।


वो उदासी,

जिसे न तुमने कहा,

न मैंने समझा…

बस दोनों के बीच

एक अनकही छाया-सी चलती रही।


इश्क़ का चेहरा

हमेशा सामने से चमकता है,

पर पीछे मुड़कर देखने पर

उसमें कुछ टूटी हुई उम्मीदें,

कुछ थकी हुई रातें

और कुछ अनसुने आहटें

हमेशा मिल जाती हैं।


हम दोनों ने

प्रेम को संभालने की कोशिश तो की,

पर शायद

अपनी-अपनी चुप्पियों का बोझ

उसकी पीठ पर रख दिया।


अब जब पीछे देखता हूँ,

तो पता चलता है

उदासी लिखी नहीं गई थी,

बस प्रेम की पीठ पर

हमारी थकान का निशान था।


और प्रेम…

वो आज भी बिना शिकायत

वही खड़ा है

अपनी पीठ पर

हमारी कहानी उठाए हुए।


मुकेश ,,,,,,,,,

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