ख़ुशबू की ख़ामोश ज़ुबान
ख़ुशबू
कभी बोलती नहीं,
पर उसकी एक भाषा होती है।
वह भाषा
हवा के कंधों पर बैठकर
धीरे-धीरे
दिल तक पहुँचती है।
तुम्हारी साँसों की महक में
एक ऐसी ही ख़ामोश ज़ुबान है,
जो बिना शब्दों के
इतनी बातें कह देती है
कि कविता भी
कभी-कभी
चुप हो जाती है।
और तब लगता है
कि दुनिया की
सबसे सच्ची बातें
हमेशा
ख़ामोशी में कही जाती हैं।
मुकेश ,,,,
No comments:
Post a Comment