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Wednesday, 11 March 2026

बिखरे हुए लम्हों की रोशनी

 बिखरे हुए लम्हों की रोशनी


जीवन

कभी एक साथ नहीं चमकता,

वह छोटे-छोटे लम्हों में

टूटकर

रोशनी बनता है।


कभी किसी मुस्कान में,

कभी किसी छूटी हुई बात में,

कभी किसी अचानक मिली

पुरानी खुशबू में।


हम अक्सर

पूरी उजास की तलाश में

भटकते रहते हैं,

और भूल जाते हैं

कि रोशनी

कभी एक जगह नहीं रहती

वह बिखरकर ही

अपना अर्थ पाती है।


कभी कोई शाम

याद बनकर चमक उठती है,

कभी कोई शब्द

सालों बाद

दिल में उजाला कर देता है।


तब समझ में आता है—

कि जीवन की असली रोशनी

किसी बड़े क्षण में नहीं,

बल्कि

उन छोटे-छोटे लम्हों में छुपी होती है

जो समय की राह पर

चुपचाप बिखर जाते हैं।


और हम

जब पीछे मुड़कर देखते हैं,

तो पाते हैं

कि वही बिखरे हुए लम्हे

मिलकर

हमारी पूरी जिंदगी को

धीरे-धीरे रोशन कर रहे थे


मुकेश ,,,,,,,,,,,

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