“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
जब याद की महक लौटती है
कुछ यादें
कभी पूरी तरह नहीं जातीं।
वे बस
किसी कोने में छिप जाती हैं।
फिर अचानक
किसी दिन
कोई खुशबू आती है—
और
वे सब
एक साथ लौट आती हैं।
जैसे
समय ने
अचानक
पीछे मुड़कर देख लिया हो।
मुकेश ,,
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