तारों की जन्मशाला
निहारिकाओं की गहराई में
एक शांत अँधेरा है
वहीं खुलती है
तारों की जन्मशाला।
धूल और गैस
बेतरतीब नहीं भटकते;
गुरुत्व का धैर्य
उन्हें धीरे-धीरे
एक केंद्र की ओर बुलाता है।
हाइड्रोजन की विरलता
सघन होने लगती है,
ताप बढ़ता है,
और एक अदृश्य गर्भ में
ऊर्जा की हलचल तेज़ होती जाती है।
यह जन्म अचानक नहीं
युगों की तैयारी है।
कणों का संयम,
दाब का संतुलन,
और अंततः
नाभिकीय संलयन की पहली चिंगारी।
जैसे ही वह चिंगारी स्थिर होती है,
अंधकार पीछे हटता है।
एक नया तारा
अपने प्रकाश से
अंतरिक्ष का नाम लिखता है।
उसकी किरणें
केवल उजाला नहीं,
रसायन भी रचती हैं
हीलियम, कार्बन,
भविष्य के जीवन की सामग्री।
तारों की जन्मशाला
किसी एक कोने में नहीं;
हर सर्पिल आकाशगंगा की भुजा में
ऐसे अनेक कक्ष हैं,
जहाँ प्रकाश
लगातार जन्म ले रहा है।
और जब कोई तारा
अपनी आयु पूर्ण करता है,
वह धूल में लौटकर
उसी जन्मशाला का
फिर से हिस्सा बन जाता है।
इस प्रकार
यह शाला बंद नहीं होती
यह चक्रीय है,
सृजन और विसर्जन का
अनंत पाठ।
हमारा सूर्य भी
कभी ऐसी ही किसी शाला में
प्रज्ज्वलित हुआ था।
और हम—
उस दीर्घ पाठ के
जीवित प्रमाण।
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