ख़ारापन भी एक मोहब्बत है
समुंदर की लहरों में
एक अजीब-सी बात है
वे हर बार किनारे तक आती हैं,
जैसे किसी से मिलने की जल्दी हो,
और हर बार लौट भी जाती हैं
जैसे कोई बात अधूरी रह गई हो।
पानी बहुत है यहाँ,
गहराइयाँ भी बेहिसाब हैं,
मगर जब होठों से लगाओ
तो बस ख़ारापन मिलता है
एक नमकीन-सी चुभन।
लोग कहते हैं
समुंदर का पानी पिया नहीं जाता,
उसमें मिठास नहीं होती।
मगर
मैंने एक दिन सोचा
क्या हर मोहब्बत मीठी ही होती है?
कुछ रिश्ते
लहरों की तरह होते हैं
बार-बार आते हैं,
बार-बार लौट जाते हैं,
मगर फिर भी
किनारे से रिश्ता नहीं टूटता।
कुछ यादें
समुंदर की तरह होती हैं
जितनी गहरी उतरोगे
उतना ही नमक मिलेगा।
और तब समझ में आता है
कि यह ख़ारापन
कोई कमी नहीं है।
यह उन आँसुओं का स्वाद है
जो सदियों से
लहरों में घुलते रहे हैं,
यह उन इंतज़ारों की महक है
जो किनारों ने चुपचाप सहे हैं।
शायद इसलिए
समुंदर कभी सूखता नहीं
क्योंकि उसकी लहरों में
मोहब्बत का एक नमकीन राज़ छुपा है।
और सच तो यह है
हर सच्ची मोहब्बत में
थोड़ा-सा दर्द,
थोड़ी-सी तिश्नगी,
और थोड़ा-सा ख़ारापन होता है।
क्योंकि कभी-कभी
ख़ारापन भी
एक मोहब्बत होता है।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,
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