मैंने अपने बारे में बहुत कुछ कहा
अपनी हारों के बारे में
अपने प्रेमों के बारे में
अपने अकेलेपन के बारे में भी
लोगों ने समझा
मैंने स्वयं को खोल दिया है
मगर वे क्या जानते
जो दरवाज़ा खुला था
वह घर का नहीं
सिर्फ बरामदे का था
भीतर अब भी कई कमरे थे
जहाँ मैं स्वयं भी
बरसों से नहीं गया था।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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