“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
मैंने बहुत समय तक सोचा
कि मेरा दुख लोगों से आया है
उनसे जो चले गए
उनसे भी जो रुके रहे
फिर एक दिन जाना
दुख का सबसे पुराना स्रोत
कोई मनुष्य नहीं होता
वह वह जीवन होता है
जिसे हम जी सकते थे
मगर नहीं जी पाए।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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