“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
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Tuesday, 24 April 2012
समंदर में उतर के गौहर ढूँढने की बातें करो
बैठे ठाले की तरंग -------------------
समंदर में उतर के गौहर ढूँढने की बातें करो
यूँ न साहिल पे बैठ के सफीने की बातें करो
मुकेश इलाहाबादी --------------------------
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