“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
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Tuesday, 14 August 2012
कुछ तो रास्ते कम थे, कुछ कोशिशें नाकाफी
कुछ तो रास्ते कम थे, कुछ कोशिशें नाकाफी
बस इतना ही किस्सा है,हमारी नाकामयाबी का
कुछ तो दोस्तों की चाल, कुछ हमारी मासूमियत बस इतना ही किस्सा है , हमारी बर्बादी का
मुकेश इलाहाबादी ----------------------------------
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