“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक
▼
Monday, 8 October 2012
हद्दे निगाह में सब कुछ विरान नज़र आता है
हद्दे निगाह में सब कुछ विरान नज़र आता है नज़र धुंधला गयी है या तूफ़ान इधर आया है ? तेरी सूरत में आज वो मुस्कान नहीं दिखती, कोई ग़म है या फिर पुराना दर्द उभर आया है ?
No comments:
Post a Comment