“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक
▼
Monday, 26 November 2012
हम इजहारे मुहब्बत भी करें तो वे परेशान हो जाते हैं
हम इजहारे मुहब्बत भी करें तो वे परेशान हो जाते हैं एक हम हैं उनके हाथो क़त्ल हो के भी ऊफ नहीं करते मुकेश इलाहाबादी --------------------------------------
No comments:
Post a Comment