“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक
▼
Thursday, 29 November 2012
हम तेरी बेवफाई को सर आखों में लिए फिरते हैं, न दी
हम तेरी बेवफाई को सर आखों में लिए फिरते हैं, न दी तूने मुहब्बत तो ज़िन्दगी भर के लिए तोहफा तो दिया मुकेश इलाहाबादी -------------------------------------------
No comments:
Post a Comment