“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
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Sunday, 2 December 2012
हया उसकी चुनरी, हया उसका जोबन, हया उसकी आबरू
हया उसकी चुनरी, हया उसका जोबन, हया उसकी आबरू इशारा के सिवा वो कैसे कह देती ?'उसे तुमसे मुहब्ब्हत है मुकेश इलाहाबादी -----------------------------------------------
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