“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
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Tuesday, 25 June 2013
किताबे मुहब्बत मे हम 'वफ़ा' लिख के लाये थे
किताबे मुहब्बत मे हम 'वफ़ा' लिख के लाये थे
वे हँस के बोले 'हमारी किताबे जीस्त मे इसका कोई काम नही'
मुकेश इलाहाबादी -----------------------------------------------------
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