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Sunday, 27 April 2014

सभी तो बेलिबास दिख रहे जँहा जाऊं

सभी तो बेलिबास दिख रहे जँहा जाऊं
फिर मै ही क्यूँ अपनी उरनियाँ छुपाऊँ

मरहम ले के आये हो तो बताओ वरना
बेवज़ह ज़ख्म अपना तुम्हे क्यूं दिखाऊँ

हर शख्स तो बौना दिखाई देता है यंहा
फिर भला किस दरपे सर अपना झुकाऊँ

अपना जिस्म खुद से सम्हाला जाता नहीं
अब  ग़म तेरे जाने का किस तरह उठाऊं

मुकेश इलाहाबादी -------------------------

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