“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक
▼
Thursday, 28 August 2014
इबादतख़ाने में हिन्दू और मुसलमान जाता है
इबादतख़ाने में हिन्दू और मुसलमान जाता है मैख़ाना वह जगह है जंहाँ सिर्फ इंसान जाता है मुझको न मतलब है बुतखाने से न मैखाने से मुकेश जंहा मुहब्बत हो वहां सुबो शाम जाता है
No comments:
Post a Comment