“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
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Tuesday, 21 October 2014
मुहब्बत करना और इज़हार न करना तेरी पुरानी आदत है
मुहब्बत करना और इज़हार न करना तेरी पुरानी आदत है अब तो मै हर राज़ तेरी खामोशी निगाहों से समझ लेता हूँ मुकेश इलाहाबादी -------------------------------------------------
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