“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
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Wednesday, 4 February 2015
सावन की झड़ी सी
सावन की झड़ी सी वो कुड़ी सांवली सी सूरत व सीरत में प्यारी सी भली सी बातें हैं उसकी जैसे मिस्री की डली सी रंगत उसकी जैसे जूही की कली सी अजनबी शहर में लगती अपनी सी
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