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Tuesday, 21 August 2018

हैरत में हूँ देखकर चेहरा तेरा

हैरत में हूँ देखकर चेहरा तेरा
चाँद से भी बेहतर चेहरा तेरा

गुलों पे शुबो की शबनम जैसे
पसीने से तरबतर चेहरा तेरा

सर्द मौसम में, गुनगुनी धूप
है जाड़े की दोपहर चेहरा तेरा

चुप रहती हो फिर भी हमसे
बोलता है अक्सर चेहरा तेरा

और भी खिल गया, झीने से 
नक़ाब में छुपकर चेहरा तेरा

मुकेश इलाहाबादी ---------



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