साथ वक़्त के साथ बदल जाओगे पता न था
तुम भी औरों की तरह निकलोगे पता न था
कारवाँ में हमारे जिस्म साथ साथ चलेंगे पर
दिलो दिमाग़ से तम दूरी रखोगे पता न था
सोचता था मिलोगे तो ढेर सारी बातें करेंगे
हम ही बोलेंगे तुम यूँ चुप रहोगे पता न था
तुमने नज़्म लिखा रुबाई लिखा हमने पढ़ा
तुम मेरा दर्दे दिल भी न पढोगे पता न था
हमें नाज़ था तुम हमारे हो हमारे ही रहोगे
तुम किसी और के हो जाओगे पता न था
मुकेश इलाहाबादी -------------------------
बहुत सुन्दर।
ReplyDeleteगुरु नानक देव जयन्ती
और कार्तिक पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ।