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Thursday, 4 June 2026

मेरे भीतर एक कमरा था

 मेरे भीतर एक कमरा था

जिसकी खिड़की हमेशा बंद रही

मैंने उसके बाहर बगीचे बनाए

चित्र टाँगे

दीपक जलाए

मगर खिड़की नहीं खोली

क्योंकि मुझे भय था

कि यदि वह खुल गई

तो जो हवा भीतर आएगी

वह मेरे सारे सजाए हुए अर्थ

उड़ा ले जाएगी।


मुकेश ,,,,,,,,,,

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