“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
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Wednesday, 30 May 2012
आखों में कुछ शोले -दिल में तूफां डाल दो
बैठे ठाले की तरंग ----------------------
आखों में कुछ शोले -दिल में तूफां डाल दो
लहू बन गया आब थोडा तेज़ाब डाल दो!
मुकेश इलाहाबादी ----------------------
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