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Saturday, 6 July 2013

हरा दुषाला ओढ कर है बैठी बाहं पसार

 
हरा दुषाला ओढ कर है बैठी बाहं पसार
आया बादल चूम गया धरती हुयी निहाल

फूलों के संग जब जब भौंरा करे किलोल
कलियों के भी मन मे रह रह उठे हिलोर

मुकेश  इलाहाबादी .........................

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