होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Friday, 7 February 2014

बेशक़ ज़ुबान मीठी रख

बेशक़ ज़ुबान मीठी रख
थोड़ा कड़वापन भी रख

घुमा फिरा के मत बोल
तू बातें सीधी साधी रख

है लहज़ा तेरा सर्द बहुत
तबियत में सरगर्मी रख

ख्वाब भले हो ऊंचे -ऊंचे
नज़रे अपनी नीची रख

चहुँ ओर फ़ैली कालिख
चादर अपनी उजली रख

मुकेश इलाहाबादी -----

No comments:

Post a Comment