“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
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Friday, 12 September 2014
ये सूखा हुआ मौसम शिकायत कर रहा है घटाओं से
ये सूखा हुआ मौसम शिकायत कर रहा है घटाओं से घटाएं जो क़ैद होके रह गयी हैं तुम्हारी इन ज़ुल्फ़ों में देख कर तुम्हारी आखों की लरज़ती बहती हुई नदी समंदर भी है खफातेरी आखों की दरिया की मौज़ों से
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