होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Monday, 22 February 2016

उनींदी आँखों का सच

नींद ने
दगा दे दिया
या,
मैंने ही,
नींद से पल्ला
छुड़ा लिया
ये तो पता नहीं
पर,
ये सच है
वर्षों पहले
तुम्हारे जाने के बाद से
आज तक
नींद भर, सोया नहीं 

(सुमी ! मेरी उनींदी आँखों का
सच तो यही है )

मुकेश इलाहबदी ---------

No comments:

Post a Comment