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Wednesday, 17 August 2016

देर तक सोचता हूँ फिर लिखता हूँ

देर तक सोचता हूँ फिर लिखता हूँ
तुझको ख़त लिखता हूँ मिटाता हूँ  
कभी उठता हूँ ,कभी बैठ जाता हूँ
जैसे तैसे मैं रातों दिन बिताता हूँ

मुकेश इलाहाबादी ---------------

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