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Monday, 20 April 2020

रात हुई रात ने चाँदनी ओढ़ ली

रात हुई रात ने चाँदनी ओढ़ ली
मैंने भी फिर से उदासी ओढ़ ली
वो आयी थी अपनी खुशी बताने
चेहरे पे मैंने झूठी हँसी ओढ़ ली
चाँद छुप गया सितारे बुझ गए
मजबूरन मैंने तीरगी ओढ़ ली
और भी क़ातिल हो गया चाँद
जब से उसने सादगी ओढ़ ली
मुकेश इलाहाबादी ------------

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