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Monday, 13 April 2026

वो मुस्कुराती है जैसे कोई दर्द

 वो मुस्कुराती है

जैसे कोई दर्द

शालीनता से रहना सीख गया हो।


पहली बार जब देखा था उसे

तो लगा

यह मुस्कान सहज है, सरल है


पर धीरे-धीरे समझ आया

यह सहज नहीं,

साधी हुई है।


उसकी हँसी

तेज़ नहीं होती

फूटती नहीं

बस हल्के से

होठों पर टिक जाती है


जैसे भीतर कुछ है

जो बहना चाहता था

पर उसने उसे

ठहरना सिखा दिया।


वो बात करती है

पूरी सजगता के साथ

शब्द नाप-तौल कर चुनती है


कभी कुछ कहकर

रुक जाती है

जैसे खुद ही

अपने वाक्य को

थाम लेती हो।


उसकी आँखों में

कोई शोर नहीं है

कोई उतावलापन नहीं


पर एक गहराई है

जैसे बहुत कुछ

देख लिया हो उसने

और अब

कुछ भी चकित नहीं करता।


वो सुनती है

ध्यान से

धैर्य से


जैसे हर व्यक्ति की बात में

वो केवल शब्द नहीं

उनके पीछे छिपे

भाव भी सुन लेती हो।


मैंने एक दिन पूछा

“तुम इतना शांत कैसे रहती हो?”


वो मुस्कुराई

वही मुस्कान

और बोली

“आदत हो गई है…”


उस “आदत” में

इतने वर्ष छिपे थे

इतनी कहानियाँ

इतनी बार

खुद को समझाना


कि अब

कुछ भी अचानक नहीं होता उसके भीतर।


वो रोती नहीं

कम-से-कम

दिखती नहीं रोती हुई


शायद रो चुकी है

इतना कि

अब आँसू भी

संयम सीख गए हैं।


उसके जीवन में

कोई नाटक नहीं है

कोई उथल-पुथल नहीं


सब कुछ

संतुलित

व्यवस्थित

और थोड़ा-सा…

चुप।


मैं उसे देखता हूँ


वो जो अपनी भावनाओं को

दबा नहीं रही

बल्कि उन्हें

धीरे-धीरे

परिष्कृत कर चुकी है।


उसका दुख

अब दर्द नहीं रहा

वो एक स्वभाव बन गया है


जैसे कोई पुराना घाव

जो अब चुभता नहीं

पर मौजूद रहता है।


वो मुस्कुराती है

हर बार

उसी शालीनता के साथ


और हर बार

मुझे लगता है


यह मुस्कान

खुशी की नहीं

समझ की है।


समझ

कि जीवन वैसा नहीं होगा

जैसा सोचा था

और फिर भी

उसे वैसे ही जीना है।


मैं उसके सामने बैठता हूँ

और सोचता हूँ


कितनी अजीब बात है

कि एक व्यक्ति

इतना संतुलित हो सकता है

और फिर भी

इतना अकेला।


वो मेरी ओर देखती है

हल्का-सा मुस्कुराती है


और उस एक मुस्कान में

पूरा जीवन समा जाता है


बिना शिकायत

बिना प्रश्न

बिना शोर।


वो मुस्कुराती है

जैसे कोई दर्द

अब उसके भीतर

घर कर चुका हो

और दोनों ने

एक-दूसरे के साथ

रहना सीख लिया हो।


कुछ दर्द चीखते नहीं,

वे धीरे-धीरे

व्यवहार बन जाते हैं

और फिर

मुस्कान की तरह

चेहरे पर टिक जाते हैं।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,

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