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Friday, 22 September 2023

अगर किसी दिन नदियाँ अपने प्रेमी समंदर का रास्ता छोड़ लौटने लगें

 अगर

किसी दिन नदियाँ
अपने प्रेमी समंदर का रास्ता छोड़
लौटने लगें
अपने पिता हिमालय की ओर
समन्दर नदियों के विरह में
उदास हो, क्षितिज के किसी छोर पे
जा मुँह ढप के सो जाए
चञ्चल चँद्रमा अपनी चंचलता
और अपनी सत्ताईस प्रेमिकाएँ छोड़
किसी अज्ञात छोर पे जा
माला जपने लगे
भौंरा गुलशन के सारे
कोमल और खूबसूरत फूलों को
अलविदा कह संन्यास ले ले
और,, मुक्कु तुम्हारे लिए
कविता लिखना छोड़
गम शुम रहने लगे
उस दिन समझ लेना
दुनिया से प्रेम विदा हो गया है
क्यूँ तुम सुन रही हो न सुमी ????
मुकेश इलाहाबादी --------------
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