लॉक डाउन का पन्द्रहवां दिन ---------------------------------


प्रकृति
की एक हल्की सी मार ने
मानव को याद दिला दिया
मानव की औकात
और
याद दिला दिया
कि
आसमान नीला भी होता है
नदी,
निर्मल भी होती है
धरती पीली नहीं हरी होती है
ये धरती
सिर्फ हमारी ही नहीं
हारिल चिड़िया
और हरे तोते को भी
हमारी मुंडेर पे
पेड़ों पे चहकने का, अधिकार है
जानवरों को भी जीने का हक़ है
और ,,
सिर्फ भागना ही nahi
ठहरने का भी नाम जीवन होता है
मुकेश इलाहाबादी -------------------

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