Posts

दर्शन - सांख्य दर्शन — भाग–३ : प्रमाण और ज्ञान — सांख्य हमें तत्त्वों का ज्ञान कैसे देता है?

  सांख्य दर्शन — प्रकृति से पुरुष और विवेक से कैवल्य तक भाग – ३ : प्रमाण और ज्ञान — सांख्य हमें तत्त्वों का ज्ञान कैसे देता है ? आत्मसन्तुलन आध्यात्मिक ऊर्जा केंद्र - सांख्य दर्शन — १५ भागों की शोधपरक श्रृंखला   यदि मुक्ति ज्ञान से है , तो ज्ञान आएगा कहाँ से ? पिछले भाग में हमने देखा कि सांख्य दर्शन का जन्म किसी बौद्धिक जिज्ञासा मात्र से नहीं , बल्कि दुःख से पूर्ण और स्थायी निवृत्ति की खोज से होता है। मनुष्य दुःख से बचने के अनेक लौकिक उपाय करता है। वे अपने - अपने क्षेत्र में उपयोगी हैं , किन्तु सांख्य के अनुसार वे दुःख का एकान्तिक और आत्यन्तिक निवारण नहीं कर सकते। इससे एक प्रश्न उठता है — यदि स्थायी मुक्ति के लिए तत्त्वज्ञान आवश्यक है , तो वह तत्त्वज्ञान प्राप्त कैसे होगा ? यहीं सांख्य की ज्ञानमीमांसा सामने आती है। क्योंकि किसी दर्शन के लिए यह कहना पर्याप्त नहीं कि — “ यथार्थ को जानो। ” अगला प्रश्न अनिवार्य है — “ जानोगे कैसे ?” ...