विष्णुधर्मोत्तर पुराण का चित्रसूत्र : भारतीय चित्रकला का विश्वकोश भारतीय कला के इतिहास में यदि किसी ग्रन्थ को चित्रकला का सर्वाधिक महत्वपूर्ण शास्त्रीय आधार कहा जाए, तो वह विष्णुधर्मोत्तर पुराण का चित्रसूत्र है। भारतीय चित्रकला की परम्परा अत्यन्त प्राचीन है। वैदिक साहित्य में रंग, रूप, प्रतीक और दृश्य-कल्पना के बीज मिलते हैं; अजंता, बाघ और सिगिरिया जैसे भित्तिचित्र उसकी परिपक्व कलात्मक अभिव्यक्तियाँ हैं। किन्तु चित्रकला के सिद्धान्तों, उद्देश्यों, विधियों और सौन्दर्यशास्त्र का व्यवस्थित प्रतिपादन जिस ग्रन्थ में मिलता है, वह चित्रसूत्र है। चित्रसूत्र केवल चित्र बनाने की तकनीक नहीं सिखाता; वह यह भी बताता है कि चित्रकला क्या है, उसका उद्देश्य क्या है, कलाकार की भूमिका क्या है, और कला का सम्बन्ध संगीत, नृत्य, वास्तु तथा आध्यात्मिकता से कैसे है। इस दृष्टि से चित्रसूत्र केवल एक कला-ग्रन्थ नहीं, बल्कि भारतीय सौन्दर्य-दर्शन का महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ है। विष्णुधर्मोत्तर पुराण का परिचय विष्णुधर्मोत्तर पुराण उपपुराणों में एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। विद्वानों के अनुसार इसका वर...