हरिवंशपुराण — भाग ६५ - भविष्यपर्व — मधु का वध और पृथ्वी का मेदिनी नाम
हरिवंशपुराण — भाग ६५ - भविष्यपर्व — मधु का वध और पृथ्वी का मेदिनी नाम मधु और विष्णु का संघर्ष केवल दो शक्तिशाली योद्धाओं के बीच का युद्ध नहीं था। इस आख्यान में एक ओर मधु का अहंकार, सत्ता की आकांक्षा और विवेक का क्षय दिखाई देता है, तो दूसरी ओर विष्णु की वह शक्ति सामने आती है जो अव्यवस्था का अंत करके सृष्टि के संतुलन की रक्षा करती है। मधु ने इन्द्र को बंधन में डालकर स्वयं को देवताओं से श्रेष्ठ सिद्ध करने का प्रयास किया था। वह इन्द्र का पद प्राप्त करना चाहता था और इसी इच्छा ने उसे देवताओं के विरुद्ध युद्ध करने के लिए प्रेरित किया। उसके साथ दैत्य-सेना थी। गन्धर्व और किन्नर अपने संगीत तथा नृत्य से युद्ध के वातावरण को प्रभावित कर रहे थे। इस बीच विष्णु ने मधु के चित्त को विषयों में उलझाकर उसके विवेक को विचलित किया और स्वयं मन्दर पर्वत पर अंतर्धान हो गए। इस प्रसंग में युद्ध केवल बाहरी शक्ति का नहीं, बल्कि मन और विवेक का भी संघर्ष बन जाता है। मधु ने क्रोध में आकर विष्णु पर प्रहार किया, किंतु विष्णु विचलित नहीं हुए। उन्होंने अपनी उँगली के अग्रभाग से मधु की छाती पर प्रहार किया। उस आघात से मध...