अध्याय–26 : मानसिक ऊर्जा, थकान और विश्राम
अध्याय–26 : मानसिक ऊर्जा, थकान और विश्राम मनुष्य की मानसिक क्षमता सीमित क्यों होती है और उसे पुनर्स्थापित कैसे किया जा सकता है? मनुष्य अपने जीवन में अनेक प्रकार की मानसिक गतिविधियाँ करता है। वह विचार करता है, निर्णय लेता है, समस्याओं का समाधान खोजता है, भावनाओं से जूझता है और अपने व्यवहार को परिस्थितियों के अनुरूप ढालने का प्रयास करता है। इन गतिविधियों के लिए मस्तिष्क को निरन्तर कार्य करना पड़ता है। किन्तु मानसिक क्षमता सदैव समान स्तर पर उपलब्ध नहीं रहती। कभी व्यक्ति अत्यन्त सहजता से कठिन कार्य कर लेता है, जबकि कभी साधारण कार्य भी उसे असाधारण रूप से कठिन प्रतीत होने लगता है। इस अन्तर को समझने के लिए मानसिक ऊर्जा, मानसिक थकान और विश्राम की प्रकृति को समझना आवश्यक है। 1. मानसिक ऊर्जा का अर्थ मानसिक ऊर्जा सामान्य भाषा में उस क्षमता को कहा जाता है जिसके सहारे व्यक्ति सोचने, समझने, निर्णय लेने, भावनात्मक परिस्थितियों का सामना करने और अपने कार्यों को सम्पन्न करने में समर्थ होता है। वैज्ञानिक दृष्टि से मानसिक ऊर्जा कोई एक पृथक पदार्थ या निश्चित मात्रा में संग्रहित शक्ति नहीं है। यह एक व...