महाभारत — शान्तिपर्व -भाग–६ : प्रजा की रक्षा — राजा का सबसे बड़ा दायित्व
महाभारत — शान्तिपर्व -भाग–६ : प्रजा की रक्षा — राजा का सबसे बड़ा दायित्व राजकोष की चर्चा के बाद युधिष्ठिर के सामने अगला प्रश्न स्वाभाविक था—यदि राजा प्रजा से कर लेता है, तो उसके बदले उसका सबसे बड़ा दायित्व क्या है? भीष्म के राजधर्म में इसका उत्तर स्पष्ट है— प्रजा की रक्षा। राजा की शक्ति का औचित्य इसी से जुड़ता है। केवल कर लेना राजधर्म नहीं है; कर के बदले सुरक्षा, न्याय और व्यवस्था देना उसका दायित्व है। युधिष्ठिर का प्रश्न युधिष्ठिर पूछते हैं कि राजा और प्रजा के बीच यह संबंध किस प्रकार स्थापित होता है और राजा अपने धर्म का पालन किस प्रकार करे। भीष्म के उत्तरों में बार-बार एक बात सामने आती है कि राजा को प्रजा की रक्षा उसी प्रकार करनी चाहिए जैसे कोई व्यक्ति अपने प्रिय और मूल्यवान वस्तु की रक्षा करता है। राज्य का वास्तविक धन केवल स्वर्ण और राजकोष नहीं है। प्रजा ही राज्य की सबसे बड़ी सम्पत्ति है। क्योंकि राजकोष प्रजा से आता है, सेना प्रजा से बनती है, कृषि प्रजा करती है, व्यापार प्रजा करती है और राज्य की संस्कृति भी प्रजा ही बनाती है। यदि प्रजा असुरक्षित हो जाए, तो राजसत्ता की बाहरी शक्त...