चिन्तन - ग्रंथ–२ : ब्रह्माण्ड- भाग–2 - "आत्मा" शब्द की संकल्पना, व्युत्पत्ति और दार्शनिक अर्थ
ग्रंथ – २ : ब्रह्माण्ड — अस्तित्व , चेतना और वास्तविकता का दार्शनिक अध्ययन फ़ाइल –011 | अध्याय –11 : आत्मा क्या है ? | भाग –2 - " आत्मा " शब्द की संकल्पना , व्युत्पत्ति और दार्शनिक अर्थ केन्द्रीय प्रश्न " आत्मा " शब्द का वास्तविक अर्थ क्या है ? क्या यह केवल किसी धार्मिक विश्वास का प्रतीक है , अथवा इसका भाषिक , दार्शनिक और अस्तित्वगत (Ontological) आधार भी है ? विभिन्न परम्पराओं ने ' आत्मा ' शब्द को किस अर्थ में ग्रहण किया है ?" किसी भी दार्शनिक अवधारणा को समझने का प्रथम चरण उसके शब्द को समझना होता है। शब्द केवल ध्वनि नहीं होते ; वे अनुभव , इतिहास , संस्कृति और विचार की दीर्घ यात्रा के वाहक होते हैं। विशेषतः भारतीय दार्शनिक परम्परा में किसी शब्द का अर्थ केवल उसकी शब्दकोशीय परिभाषा से निर्धारित नहीं होता , बल्कि उसके वैदिक प्रयोग , व्याकरणिक संरचना , दार्शनिक विकास और आध्यात्मिक अनुभूति — इन सभी के समन्वय से निर्मित होता है। ...