महाभारत — सौप्तिकपर्व — भाग ३ : पाण्डव शिविर का रात्रि-संहार — उपपाण्डवों की मृत्यु
महाभारत — सौप्तिकपर्व — भाग ३ : पाण्डव शिविर का रात्रि-संहार — उपपाण्डवों की मृत्यु रात्रि में अश्वत्थामा पाण्डव शिविर में प्रवेश कर चुका था। धृष्टद्युम्न की हत्या के बाद उसका प्रतिशोध अब किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा। वह शिविर में आगे बढ़ता गया। सोए हुए योद्धाओं को अपने आक्रमण का लक्ष्य बनाता गया। यहाँ महाभारत की कथा अपने सबसे कठोर रूप में सामने आती है। पांचाल सेना पर आक्रमण पाण्डवों की ओर से युद्ध करने वाली पांचाल सेना उस रात विजय के विश्वास में विश्राम कर रही थी। दिन का युद्ध समाप्त हो चुका था। किसी को अनुमान नहीं था कि रात में शत्रु शिविर के भीतर पहुँच चुका है। अश्वत्थामा ने अचानक आक्रमण किया। योद्धा जागे, लेकिन अन्धकार और आकस्मिक आक्रमण के कारण व्यवस्थित प्रतिरोध नहीं कर सके। कई सैनिक मारे गए। शिविर में भय और अफरा-तफरी फैल गई। शिखण्डी और अन्य योद्धा इस रात्रि-संहार में अनेक प्रमुख योद्धा भी मारे गए। शिखण्डी, जो भीष्म के पतन का महत्वपूर्ण कारण बना था, भी इस हमले में मारा गया। पांचाल और सोमक पक्ष के अनेक योद्धा भी अश्वत्थामा के आक्रमण का शिकार हुए। यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर ...