महाभारत — द्रोणपर्व अभिमन्यु और चक्रव्यूह : जब युद्ध ने अपनी मर्यादा को चुनौती दी
महाभारत — द्रोणपर्व अभिमन्यु और चक्रव्यूह : जब युद्ध ने अपनी मर्यादा को चुनौती दी द्रोण सेनापति बन चुके थे। उनके सामने स्पष्ट लक्ष्य था— युधिष्ठिर को जीवित पकड़ना। लेकिन एक बाधा थी— अर्जुन। जब तक अर्जुन युधिष्ठिर के पास है, द्रोण के लिए यह लक्ष्य लगभग असम्भव है। इसलिए अर्जुन को मुख्य रणभूमि से दूर करने के लिए संशप्तकों को उसके सामने खड़ा किया गया। अर्जुन उनके साथ युद्ध करने निकल गया। अब मुख्य युद्धक्षेत्र में युधिष्ठिर अपेक्षाकृत असुरक्षित थे। और इसी दिन द्रोण ने एक ऐसी युद्ध-रचना बनाई जिसने महाभारत की कथा को हमेशा के लिए बदल दिया— चक्रव्यूह। 1. चक्रव्यूह क्या था? महाभारत में इसे केवल एक साधारण सैनिक पंक्ति नहीं बताया गया। यह एक जटिल सैन्य-व्यूह था, जिसमें प्रवेश करना और उसके भीतर आगे बढ़ना अत्यंत कठिन था। द्रोण ने ऐसी स्थिति बनाई जिसमें पाण्डव सेना के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि— अर्जुन वहाँ नहीं था। युधिष्ठिर को भय था कि यदि व्यूह नहीं तोड़ा गया तो द्रोण अपने उद्देश्य में सफल हो सकते हैं। तभी सामने आता है— अभिमन्यु। अर्जुन और सुभद्रा का पुत्र। अभी युवा। लेकिन असाधारण युद्धकौ...