हरिवंशपुराण शोधग्रन्थ - समाहार-निबन्ध
हरिवंशपुराण शोधग्रन्थ - समाहार-निबन्ध — हरिवंशपुराण का स्वरूप, हमारी शोध-यात्रा, उपलब्धियाँ और भावी अध्ययन की दिशा हरिवंशपुराण को समझने का अर्थ केवल श्रीकृष्ण की कथा पढ़ लेना नहीं है। इसका अर्थ है—महाभारत की परम्परा से जुड़े उस विस्तृत आख्यान-संसार में प्रवेश करना, जहाँ सृष्टि, वंशावली, देव-असुर संघर्ष, राजधर्म, अवतारवाद, भक्ति, दान, तपस्या और मनुष्य के नैतिक निर्णय एक-दूसरे से जुड़ते हैं। इस शोध-यात्रा का उद्देश्य कथा को दोहराना भर नहीं, बल्कि उसके मूल पाठ, परम्परागत अर्थ, पाठभेद, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आधुनिक प्रश्नों को एक साथ समझने की दिशा बनाना है। प्रस्तावना : हमने हरिवंशपुराण का अध्ययन क्यों आरम्भ किया? किसी प्राचीन ग्रन्थ का अध्ययन करने के पीछे कई उद्देश्य हो सकते हैं। कोई व्यक्ति उसमें श्रद्धा के कारण प्रवेश करता है, कोई साहित्यिक सौन्दर्य के कारण, कोई इतिहास और संस्कृति की खोज में, तो कोई दर्शन और जीवन-मूल्यों को समझने के लिए। हरिवंशपुराण के अध्ययन में ये सभी उद्देश्य एक-दूसरे से जुड़ते हैं। हमारा उद्देश्य इस ग्रन्थ की कथा को सरल भाषा में पाठकों के सामने रखना, उसके प्रसं...