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भगवद्गीता प्रथम अध्याय, एकादश श्लोक : एक शोधपूर्ण, रोचक, मनोवैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक विवेचन

  भगवद्गीता प्रथम अध्याय, एकादश श्लोक : एक शोधपूर्ण, रोचक, मनोवैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक विवेचन मूल श्लोक - अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः । भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ॥ १.११ ॥ अन्वय - सर्वेषु अयनेषु यथाभागम् अवस्थिताः भवन्तः सर्वे एव हि भीष्मम् एव अभिरक्षन्तु। सामान्य हिन्दी अर्थ - आप सब अपने-अपने मोर्चों पर स्थित होकर सभी ओर से पितामह भीष्म की ही रक्षा करें। भूमिका : क्या भीष्म को रक्षा की आवश्यकता थी? यह प्रश्न बहुत रोचक है। महाभारत का सबसे महान योद्धा कौन था? द्रोण?  कर्ण? अर्जुन? नहीं। उस समय सम्पूर्ण आर्यावर्त में भीष्म के समान योद्धा कोई नहीं था। इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त व्यक्ति, अपराजेय धनुर्धर, युद्धकला का महासागर। फिर दुर्योधन क्यों कहता है—  "भीष्ममेव अभिरक्षन्तु"  "भीष्म की रक्षा करो।" क्या वास्तव में भीष्म को सुरक्षा की आवश्यकता थी? या दुर्योधन किसी और भय को छिपा रहा था? यही इस श्लोक का रहस्य है। 1. "अयनेषु" — केवल मोर्चे नहीं, जीवन के द्वार "अयन" शब्द का अर्थ है— मार्ग , प्रवेशद्वार ,संचरण-पथ सामान्य अर्थ में यहाँ युद...

भगवद्गीता प्रथम अध्याय, दशम श्लोक : एक शोधपूर्ण, रोचक, वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक विवेचन

 भगवद्गीता प्रथम अध्याय, दशम श्लोक : एक शोधपूर्ण, रोचक, वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक विवेचन मूल श्लोक - पर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम् ।पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम् ॥ १.१० ॥ अन्वय - भीष्माभिरक्षितम् अस्माकं तत् बलम् अपर्याप्तम्, एतेषां भीमाभिरक्षितम् इदं बलम् तु पर्याप्तम्। सामान्य हिन्दी अर्थ भीष्म द्वारा संरक्षित हमारी सेना असीम (या अपरिमित) है, जबकि भीम द्वारा संरक्षित इन पाण्डवों की सेना सीमित है। भूमिका : यह श्लोक वास्तव में क्या कहता है? भगवद्गीता का यह श्लोक महाभारत के सबसे विवादास्पद श्लोकों में से एक है। क्यों? क्योंकि "अपर्याप्तम्" और "पर्याप्तम्" शब्दों का अर्थ लेकर विद्वानों में लम्बे समय से मतभेद रहा है। सामान्य अर्थ लिया जाता है— हमारी सेना असीम है। उनकी सेना सीमित है। किन्तु यदि दुर्योधन के मनोविज्ञान को देखें तो एक दूसरा अर्थ भी सम्भव है— हमारी सेना पर्याप्त नहीं है। उनकी सेना पर्याप्त है। यही कारण है कि अनेक आधुनिक विद्वान इस श्लोक को दुर्योधन के अन्तःकरण की अनकही घबराहट के रूप में भी पढ़ते हैं। 1. यह संख्या का नहीं, आत्मविश्वास का...

यस्यां वेदिं परिगृह्णन्ति भूम्याम्…” — पृथ्वी सूक्त के त्रयोदश मंत्र की वैज्ञानिक एवं शोधात्मक व्याख्या

  “ यस्यां वेदिं परिगृह्णन्ति भूम्याम् …” — पृथ्वी सूक्त के त्रयोदश मंत्र की वैज्ञानिक एवं शोधात्मक व्याख्या पृथ्वी सूक्त का त्रयोदश मंत्र पृथ्वी को केवल प्राकृतिक संसाधनों की धारिणी के रूप में नहीं , बल्कि मानव सभ्यता , ज्ञान , विज्ञान , संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की आधारभूमि के रूप में प्रस्तुत करता है। यदि पूर्ववर्ती मंत्रों में पृथ्वी के पर्वत , वन , जल , औषधियाँ और जीवनदायिनी शक्ति का वर्णन था , तो इस मंत्र में पृथ्वी को यज्ञ , वेदी , ध्वनि , ज्ञान और सांस्कृतिक विकास का केन्द्र माना गया है। आधुनिक विज्ञान के संदर्भ में यह मंत्र विशेष महत्त्व रखता है क्योंकि यह दर्शाता है कि मानव सभ्यता का प्रत्येक वैज्ञानिक , सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास पृथ्वी पर ही सम्भव हुआ है। पृथ्वी केवल जैविक जीवन की जननी नहीं , बल्कि मानव ज्ञान (Human Knowledge System) की भी जननी है।   मंत्र - पाठ यस्यां वेदिं परिगृह्णन्ति भूम्यां यस्यां यज्ञं तन्वते विश्वकर्माणः। यस्य...

शब्दयात्री — जब तुम्हारे बदन की रूहानी ख़ुशबू महसूस करता हूँ

  शब्दयात्री — जब तुम्हारे बदन की रूहानी ख़ुशबू महसूस करता हूँ जब तुम्हारे बदन की रूहानी ख़ुशबू महसूस करता हूँ, तो मुझे हमेशा यह लगता है कि ख़ुशबू सिर्फ़ फूलों में नहीं होती, कुछ लोग भी ख़ुशबू की तरह होते हैं। वे जहाँ होते हैं, वहाँ की फ़िज़ा बदल जाती है। और जहाँ नहीं होते, वहाँ भी उनकी महक देर तक ठहरी रहती है। तुम्हारी ख़ुशबू को मैं किसी इत्र या किसी फूल की ख़ुशबू की तरह नहीं पहचानता। वह कुछ और है। उसमें तुम्हारे होने की आहट है, तुम्हारी रूह की नरमी है, तुम्हारी ख़ामोशियों का रंग है। कई बार तुम मेरे पास नहीं होते, फिर भी अचानक हवा का कोई झोंका गुज़रता है और मुझे लगता है कि तुम यहीं कहीं हो। जैसे तुम्हारी मौजूदगी ने हवा में अपना कोई नर्म-सा निशान छोड़ दिया हो। मुझे हमेशा हैरत होती है कि यादों की भी कोई ख़ुशबू होती है। कुछ लोग हमारी ज़िंदगी से गुज़र जाते हैं, लेकिन उनकी आवाज़ से पहले उनकी महक याद आती है। उनकी बातों से पहले उनका एहसास लौटता है। शायद इसलिए कि ख़ुशबू सीधे दिल तक पहुँचती है। उसे अल्फ़ाज़ की ज़रूरत नहीं पड़ती। जब तुम्हारे बदन की वह रूहानी ख़ुशबू मेरे आसपास उतरत...

शब्दयात्री — जब तुम दूर होते हो

  शब्दयात्री — जब तुम दूर होते हो जब तुम दूर होते हो, तब मैं तुम्हें सबसे ज़्यादा महसूस करता हूँ। यह बात सुनने में अजीब लग सकती है, लेकिन मोहब्बत की दुनिया में बहुत-सी बातें अजीब होकर भी सच होती हैं। तुम्हारी मौजूदगी में मेरा ध्यान अक्सर तुम्हारी बातों, तुम्हारी मुस्कुराहट, तुम्हारी आँखों और तुम्हारे आसपास बिखरी हुई रौशनी में उलझा रहता है। मगर जब तुम दूर होते हो, तब तुम्हारे होने की तमाम परतें धीरे-धीरे खुलने लगती हैं। तब मैं तुम्हें देखता नहीं, महसूस करता हूँ। तुम्हारी आवाज़ नहीं सुनता, उसकी गूँज सुनता हूँ। तुम्हारे हाथों को नहीं छूता, उनकी हरारत याद करता हूँ। और यह अजीब है कि दूरी कई बार वह सब महसूस करा देती है, जो क़ुर्बत नहीं करा पाती। जब तुम दूर होते हो, तुम्हारा ख़याल किसी ख़ुशबू की तरह मेरे आसपास फैल जाता है। बिना किसी आहट के। बिना किसी दस्तक के। मैं किसी किताब का सफ़्हा पलट रहा होता हूँ, और अचानक कोई जुमला तुम्हारी याद दिला देता है। मैं किसी सड़क से गुज़र रहा होता हूँ, और हवा का एक झोंका तुम्हारा नाम लेकर गुज़र जाता है। मैं चाय का पहला घूँट लेता हूँ और न जाने क्यों तुम्हारी...

शब्दयात्री — तुम्हें छू लेना

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  शब्दयात्री — तुम्हें छू लेना कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि किसी को छू लेना आख़िर क्या होता है? क्या यह सिर्फ़ इतना है कि एक हाथ दूसरे हाथ तक पहुँच जाए? कि उँगलियाँ किसी हथेली की हरारत महसूस कर लें? कि दो जिस्म एक लम्हे के लिए एक-दूसरे की क़ुर्बत में आ जाएँ? नहीं... अगर स्पर्श का मतलब सिर्फ़ इतना होता, तो दुनिया में इतने लोग एक-दूसरे को छूकर भी एक-दूसरे से महरूम न रहते। धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि किसी को छू लेना उसके जिस्म तक पहुँचना नहीं, उसकी रूह तक पहुँच जाना है। तुम्हें छू लेने की मेरी ख़्वाहिश कभी तुम्हारे हाथों तक महदूद नहीं रही। मैं तुम्हारी आँखों में ठहरी हुई उन ख़ामोशियों को छूना चाहता था, जिन्हें तुमने बरसों से अपने सीने में महफ़ूज़ रखा है। मैं तुम्हारी मुस्कुराहट के पीछे छिपी हुई उस थकान को छूना चाहता था, जो हर शाम तुम्हारे चेहरे पर उतर आती है और फिर भी किसी से अपना हाल नहीं कहती। मैं तुम्हारे भीतर उस मुक़ाम तक पहुँचना चाहता था जहाँ तुम दुनिया की निगाहों से दूर, ख़ुद अपने साथ बैठती हो। मुझे हमेशा लगा है कि मोहब्बत में सबसे दिलकश स्पर्श वह नहीं होता जो त्वचा पर महसूस हो। सबस...