सांख्य दर्शन — भाग १३ पच्चीस तत्त्वों का रहस्य : प्रकृति से पुरुष तक सांख्य का सम्पूर्ण मानचित्र
सांख्य दर्शन — भाग १३ पच्चीस तत्त्वों का रहस्य : प्रकृति से पुरुष तक सांख्य का सम्पूर्ण मानचित्र पिछले भाग में हमने देखा कि सांख्य किसी तत्त्व को केवल इसलिए स्वीकार नहीं करता कि वह परम्परा में कहा गया है। वह पूछता है — उसके ज्ञान का प्रमाण क्या है ? प्रत्यक्ष , अनुमान और आप्तवचन के आधार पर सांख्य अपने तत्त्वों की स्थापना करता है। अब तक हमने इन तत्त्वों को अलग - अलग प्रसंगों में देखा है। प्रकृति को देखा। महत् को समझा। अहंकार से मन और इन्द्रियों की उत्पत्ति समझी। तन्मात्राओं से महाभूतों का विकास देखा। पुरुष को प्रकृति से भिन्न साक्षी के रूप में समझा। लेकिन अभी तक यह पूरा दर्शन एक जीवित मानचित्र की तरह हमारे सामने नहीं आया है। इसलिए इस भाग में सांख्य की सबसे प्रसिद्ध संरचना को एक साथ रखेंगे — पच्चीस तत्त्व। लेकिन केवल उनकी सूची नहीं। हम यह भी देखेंगे कि इनमें कौन — प्रकृति है , कौन विकृति है , कौन प्रकृति भी है और विकृत...