महाभारत — स्त्रीपर्व - भाग–८ : कर्ण का जलदान — एक रहस्य का अंतिम संस्कार
महाभारत — स्त्रीपर्व - भाग–८ : कर्ण का जलदान — एक रहस्य का अंतिम संस्कार कुरुक्षेत्र में मृत योद्धाओं के अन्त्येष्टि-कर्म की तैयारी होने लगी। युद्ध में मारे गये राजाओं, महारथियों और सैनिकों के लिए उनके संबंधी आगे आए। जिनके परिवार युद्धभूमि तक पहुँच सके, उन्होंने अपने मृतकों को पहचाना और अंतिम संस्कार किया। पाण्डव भी अपने प्रियजनों और युद्ध में मारे गये संबंधियों के लिए कर्म करने लगे। तभी कुन्ती ने अपने पुत्रों को अपने पास बुलाया। उनके सामने अब वह सत्य था जिसे वह युद्ध के बाद छिपा नहीं सकती थीं। उन्होंने कर्ण के विषय में स्पष्ट रूप से बताया— कर्ण तुम्हारा ज्येष्ठ भ्राता था। यह बात पाण्डवों के लिए दूसरी बार नहीं, बल्कि पहली बार पूर्ण रूप से सामने आई। युद्ध समाप्त हो चुका था। अब इस सत्य को बदलने के लिए कोई निर्णय शेष नहीं था। केवल एक कर्तव्य शेष था— अपने मृत भाई का संस्कार। कर्ण के लिए जल पाण्डवों ने कर्ण को अपना भाई स्वीकार किया। युधिष्ठिर सहित सभी ने उसके लिए जल अर्पित किया। यह छोटा-सा संस्कार महाभारत की कथा में बहुत बड़ा अर्थ रखता है। जीवन में कर्ण और पाण्डवों के बीच प...