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Saturday, 14 March 2026

तुम्हारी याद और शाम का अकेलापन

 तुम्हारी याद और शाम का अकेलापन

शाम ढल रही है,

और खिड़की से आती हवा

थोड़ी ठंडी है।

तुम्हारी याद

धीरे-धीरे

कमरे में फैल रही है,

जैसे

अकेलापन भी

उसके साथ बैठ गया हो।

कोई आवाज़ नहीं,

सिर्फ़

दिल की हल्की-सी धड़कन

और तुम्हारी याद का

सुकून।

शाम अब

ख़ाली नहीं—

तुम्हारी याद

उसमें रह गई है।

मुकेश्,,, 

यादों के बीच ठहरा हुआ एक पल

 यादों के बीच ठहरा हुआ एक पल

यादों के बीच

ठहर गया है

एक छोटा सा पल।

न वह बिल्कुल नया है,

न वह पुराना

बस

बीते वक़्त की हल्की-सी परछाई

दिल में बैठी हुई है।

कभी आँखें बंद होती हैं,

तो वह पल

धीरे-धीरे

हर सांस में

गुज़रता है।

लगता है

कुछ पल

सिर्फ़ ठहरने के लिए

ही बनाए गए हैं। 

मुकेश्,,, 

तुम्हारी ख़ामोशी में छुपा हुआ इश्क़

 तुम्हारी ख़ामोशी में छुपा हुआ इश्क़

तुम्हारी ख़ामोशी

एक धीमी नदी की तरह है,

जो दिखती नहीं,

पर दिल के कोनों तक

बह जाती है।

कभी कोई शब्द नहीं बोलता,

फिर भी

हर पल में

तुम्हारा इश्क़

धीरे-धीरे उतर जाता है।

ख़ामोशी में

तुम्हारी मौजूदगी

इतनी गहरी है

कि आवाज़ बनकर नहीं,

सिर्फ़ महसूस होकर

दिल तक पहुँचती है। 

मुकेश्,,, 

पढ़ा गया मैसेज और अनकहा जवाब

 पढ़ा गया मैसेज और अनकहा जवाब

मैसेज

पढ़ लिया गया था

स्क्रीन पर

दो नीली टिक

चुपचाप खड़ी थीं।

शब्द

तुम तक पहुँच गए थे,

पर जवाब

जैसे कहीं

दिल में ही रुक गया।

कभी-कभी

बातचीत

यहीं ख़त्म नहीं होती

पढ़े गए मैसेज के बाद

भी

एक लंबी

अनकही बातचीत

चलती रहती है।

.मुकेश्,,,,, 

टाइप करके फिर मिटा दिया गया मैसेज

 टाइप करके फिर मिटा दिया गया मैसेज

स्क्रीन पर

कुछ शब्द उभरे थे

धीरे-धीरे

तुम्हारा नाम,

फिर

एक छोटी-सी बात।

उँगलियाँ

कुछ देर तक

रुककर सोचती रहीं।

फिर

एक-एक करके

सारे शब्द

मिटा दिए गए।

मैसेज नहीं गया—

पर दिल में

वह पूरी बात

अब भी लिखी हुई है।

मुकेश्,,,, 

देर रात का अनखुला नोटिफ़िकेशन

 देर रात का अनखुला नोटिफ़िकेशन

देर रात

मोबाइल की स्क्रीन पर

एक छोटा-सा

नोटिफ़िकेशन चमका।

नाम तुम्हारा था,

पर उँगलियाँ

उसे खोलने से पहले

थोड़ी देर ठहर गईं।

शायद

कुछ बातें

तुरंत पढ़ लेने के लिए नहीं होतीं।

इसलिए

वह नोटिफ़िकेशन

रात भर

चुपचाप

स्क्रीन पर पड़ा रहा

जैसे

कोई अनकही बात

नींद के पास

बैठी हो।

मुकेश्,,,, 

तुम्हारा मेरे मैसेज देख के इग्नोर करना

 तुम्हारा मेरे मैसेज देख के इग्नोर करना

तुम्हारा

मेरे मैसेज देख कर

चुप रह जाना

जैसे

शब्द पहुँच गए हों

पर जवाब

रास्ते में कहीं

रुक गया हो।

स्क्रीन पर

नीली टिक तो है,

पर उसके बाद

एक लंबी-सी

ख़ामोशी है।

कभी-कभी

इग्नोर किया हुआ मैसेज भी

दिल में

पूरी बातचीत

जगा देता है।

मुकेश्,,,,