महाभारत - अध्याय 3.5 उपाख्यान : मुख्य कथा के भीतर दूसरी कथाएँ क्यों?
अब 3.5 । इस भाग में केवल यह शोधेंगे कि उपाख्यान महाभारत में क्यों हैं और वे मुख्य कथा के भीतर क्या काम करते हैं । पहले के भागों की संरचना संबंधी चर्चा दोहराई नहीं जाएगी। अध्याय 3.5 उपाख्यान : मुख्य कथा के भीतर दूसरी कथाएँ क्यों? महाभारत को पढ़ते हुए बार-बार ऐसा लगता है कि मुख्य कथा कहीं रुक गई है। युधिष्ठिर वन में हैं—और अचानक नल-दमयंती की कथा आरंभ हो जाती है। किसी अन्य प्रसंग में सावित्री की कथा आती है। कहीं प्राचीन राजाओं की वंशकथाएँ खुलती हैं। कहीं रामोपाख्यान आता है। पहली दृष्टि में यह सब मुख्य कथा से बाहर जाता हुआ दिखाई दे सकता है। लेकिन यदि महाभारत की रचना को ध्यान से पढ़ें, तो स्पष्ट होता है कि ये कथाएँ केवल अतिरिक्त सामग्री नहीं हैं। वे मुख्य कथा के भीतर उपस्थित किसी प्रश्न को दूसरे जीवन-संदर्भ में प्रकाशित करती हैं। इसलिए उपाख्यान को समझने का मूल प्रश्न यह नहीं होना चाहिए— “यह कथा यहाँ क्यों जोड़ दी गई?” बल्कि— “यह कथा जिस स्थान पर आई है, वहाँ वह कौन-सा प्रश्न स्पष्ट कर रही है?” उपाख्यान क्या करता है? उपाख्यान मुख्य कथा को आगे बढ़ाने के बजाय कई बार उसके अर्थ क...