होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Monday, 8 June 2026

आख़िरी प्रेमी

 

आख़िरी प्रेमी

वैज्ञानिकों की एक टीम ने

दावा किया है

कि उन्होंने खोज लिया है

दुनिया का आख़िरी प्रेमी।

उसे एक छोटे से कमरे में

सुरक्षित रखा गया है।

विशेषज्ञ उसकी आदतों का अध्ययन कर रहे हैं।

वह अब भी

कविताएँ पढ़ता है।

फूलों की गन्ध पहचानता है।

और किसी के दुख पर

चुप हो जाता है।

वैज्ञानिक हैरान हैं।

इतनी उन्नत सभ्यता में

यह व्यवहार असामान्य माना जाता है।

उसे देखने

दूर-दूर से लोग आते हैं।

बच्चे उँगली दिखाकर पूछते हैं—

"पापा,

क्या सचमुच लोग

ऐसे भी हुआ करते थे?"

और आख़िरी प्रेमी

खिड़की से बाहर देखते हुए

धीरे से कहता है

"नहीं बेटा,

लोग नहीं।

मनुष्य।"

मुकेश ,,,,,,,,

प्रेम और बाजार

 

प्रेम और बाजार

बाज़ार ने कहा

"जो बिक नहीं सकता

उसका कोई मूल्य नहीं।"

फिर उसने

सपने बेचे।

उदासी बेची।

अकेलापन बेचा।

यहाँ तक कि

मुस्कुराहट भी बेच दी।

लेकिन प्रेम

हर बार

दुकान के पिछले दरवाज़े से निकल गया।

वह कभी

माँ के हाथ की रोटी में छिप जाता,

कभी

किसी मज़दूर की जेब में रखे

मुड़े-तुड़े ख़त में।

व्यापारियों ने बहुत खोजा।

मगर प्रेम

मुनाफ़े की भाषा

सीख ही नहीं पाया।

मुकेश ,,,,,,,,

प्रेम का मौसम विभाग

 

प्रेम का मौसम विभाग

आज मौसम विभाग ने

एक विशेष चेतावनी जारी की है।

उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में

अचानक प्रेम की वर्षा हो सकती है।

लोगों को सलाह दी जाती है

कि वे

अपने पूर्वाग्रह घर के भीतर रखें।

जाति, धर्म और नफ़रत के छाते

तेज़ हवा में उड़ सकते हैं।

कुछ क्षेत्रों में

आँखें भीगने की संभावना है।

कई जगह

पुराने घावों पर

हरे अंकुर निकल सकते हैं।

उधर चैनलों पर

विशेषज्ञ बहस कर रहे हैं

कि प्रेम

प्राकृतिक आपदा है

या विदेशी साज़िश।

इधर

एक बच्चा

बारिश में भीगते हुए

चुपचाप मुस्कुरा रहा है।


मुकेश ,,,,,,,,

विकास और प्रेम

 

विकास और प्रेम

सड़क चौड़ी की जानी थी।

नक़्शा बन चुका था।

बुलडोज़र तैयार खड़े थे।

सबसे पहले

वह पीपल काटा गया

जिस पर

एक लड़के ने कभी लिखा था—

"मैं उसे चाहता हूँ।"

फिर वह पोखर भरा गया

जिसमें

एक लड़की ने

अपना चेहरा देखकर

प्रेम का पहला अर्थ समझा था।

नगर विकास अधिकारी ने कहा—

"अब यहाँ प्रगति होगी।"

सचमुच प्रगति हुई।

मॉल बना।

फ़्लैट बने।

पार्किंग बनी।

बस

उस पूरे इलाके में

किसी को

किसी की प्रतीक्षा करना

याद नहीं रहा।

मुकेश ,,,,,,,,

प्रेम की गुमशुदगी की रिपोर्ट

प्रेम की गुमशुदगी की रिपोर्ट

थाने में दर्ज है

एक पुरानी रपट।

गुमशुदा का नाम — प्रेम।

रंग — बदलता रहता है।

कद — दो धड़कनों के बीच जितना।

पहचान —

जहाँ दिखाई दे

वहीं से गायब हो जाता है।

आख़िरी बार

उसे देखा गया था

एक बूढ़ी स्त्री की आँखों में

जो चालीस बरस बाद भी

अपने मृत पति से बातें करती थी।

दरोगा ने कहा

"इतने साल हो गए,

अब तो इसे मृत मान लेना चाहिए।"

तभी

रपट के कोने पर बैठी

एक तितली हँस पड़ी।

और फ़ाइल से

अचानक

गुलमोहर की गन्ध आने लगी।

मुकेश ,,,,,,,,

पंचायत बनाम चिड़िया

  पंचायत बनाम चिड़िया

उस दिन पंचायत बैठी थी

बहुत गंभीर मामला था।

आरोप था

कि एक लड़का और एक लड़की

बारिश देख रहे थे साथ-साथ।

गवाह थे

दो आम के पेड़,

एक कुआँ

और आधा चाँद।

पंचों ने कहा—

यह परम्परा के खिलाफ़ है।

चाँद को चेतावनी दी गई

कि आगे से

प्रेमियों पर रोशनी न डाले।

हवा को नोटिस भेजा गया

कि वह ख़तों की खुशबू

एक घर से दूसरे घर न पहुँचाए।

एक चिड़िया ने

कार्यवाही के बीच कहा—

"लेकिन प्रेम तो..."

इतना सुनना था कि

उसे असामाजिक तत्व घोषित कर दिया गया।

अगले दिन

गाँव के सारे पेड़ उदास थे।

नदी चुप थी।

सरकंडों ने सिर झुका लिया था।

और खेतों में

गेहूँ की बालियाँ

ऐसे काँप रही थीं

जैसे किसी लड़की ने

पहली बार

अपना नाम प्रेम के साथ लिखा हो।

पंचायत जीत गई।

चिड़िया हार गई।

मगर उसी रात

आकाश में

हज़ारों चिड़ियाँ उड़ती दिखीं।

कहते हैं

प्रेम जब मारा जाता है

तो परिंदों के रूप में

वापस लौटता है।


मुकेश ,,,,,,,,

प्रेम की पुरातत्व-खुदाई

प्रेम की पुरातत्व-खुदाई

कहा गया है

कि इस धरती पर

कभी प्रेम नाम का एक जीव रहता था।

उसके पंख नहीं थे

फिर भी वह उड़ लेता था

सीमाओं के आर-पार।

उसकी कोई जात नहीं थी

फिर भी सब जातियों में जन्म ले लेता था।

पुरातत्व विभाग ने

हाल ही में एक खुदाई में

दो हथेलियाँ बरामद की हैं

जो सदियों बाद भी

एक-दूसरे को थामे हुए थीं।

विशेषज्ञों का कहना है

यह किसी विलुप्त प्रजाति का अवशेष हो सकता है।

उधर संसद में

इस पर बहस जारी है

कि प्रेम राष्ट्रीय विरासत है

या राष्ट्रीय खतरा।

इधर गाँव के बाहर

बरगद अब भी गवाही देता है

कि उसने देखा था

दो लोगों को

एक-दूसरे की आँखों में

भविष्य बोते हुए।

तभी से

बरगद के पत्तों पर

अफवाहें उगती हैं।

और प्रेम?

वह शायद

किसी संग्रहालय की टूटी अलमारी में

धूल खा रहा है

या किसी लड़की की डायरी में

अब भी साँस ले रहा है।

मुकेश ,,,,,,,,