हरिवंशपुराण शोधग्रन्थ - भाग–५८ : गन्धर्वों, अप्सराओं और विविध प्राणी-समूहों की उत्पत्ति
हरिवंशपुराण शोधग्रन्थ - भाग–५८ : गन्धर्वों, अप्सराओं और विविध प्राणी-समूहों की उत्पत्ति हरिवंशपुराण के भविष्यपर्व में सृष्टि की उत्पत्ति और उसके विविध रूपों का वर्णन केवल भौतिक जगत् तक सीमित नहीं है। इसमें देवताओं, ऋषियों, गन्धर्वों, अप्सराओं, मनुष्यों तथा अन्य प्राणी-समूहों की उत्पत्ति के माध्यम से सृष्टि की व्यापकता और विविधता को समझाने का प्रयास किया गया है। प्रस्तुत प्रसंग में ब्रह्मा की सृष्टि-प्रक्रिया, वेदवाणी की महिमा और जगत् में जीवन के विविध रूपों के प्रादुर्भाव का वर्णन मिलता है। ब्रह्मा की मानसिक सृष्टि सृष्टि के विस्तार के लिए ब्रह्मा ध्यान और योग के माध्यम से विभिन्न प्राणी-समूहों की रचना करते हैं। पुराण की वर्णन-पद्धति में सृष्टि का यह कार्य केवल शारीरिक उत्पत्ति नहीं, बल्कि संकल्प, चेतना और सृजन-शक्ति से भी जुड़ा हुआ है। ब्रह्मा की मानसिक सृष्टि का आशय यह है कि जगत् के विविध रूप एक मूल सृजन-संकल्प से प्रकट होते हैं। इस दृष्टि से ब्रह्मा सृष्टि के उस मूल सिद्धान्त के प्रतीक हैं, जिसके माध्यम से अव्यक्त सम्भावनाएँ व्यक्त रूप ग्रहण करती हैं। अप्सराओं और गन्धर्वों की उ...