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Monday, 21 May 2018

वज़ूद पे जंगल उग आये हैं

वज़ूद पे जंगल उग आये हैं
सीने में समंदर हरहराये है

मै, उड़ जाऊँगा खलाओं में
मुझे तो आसमान बुलाये है

तुझको  क्या मालूम मुझे 
तेरी अदाएं बहुत सताये है

पहले बहुत सीधा सादा था
चालाकी,दुनिया सिखाये है

मुकेश मै आज बहुत खुश हूँ,
मेरे ख़त का जवाब आये है

मुकेश इलाहाबादी ------

Saturday, 19 May 2018

बहुत ही हसीन, बहुत ही प्यारे हैं

बहुत ही हसीन, बहुत ही प्यारे हैं
मेरी आँखों में जो ख्वाब तुम्हारे हैं

है फ़क़्त तेरी आँखों का पानी मीठा
बाकी दरिया ताल तल्लैया खारे हैं

मुकेश इलाहाबादी -------------------

इक प्यास ले के ज़िंदा हूँ

इक प्यास ले के ज़िंदा हूँ
तेरी आस ले के ज़िंदा हूँ

गर मै ज़िंदा हूँ अभी तो
तेरी साँस ले के ज़िंदा हूँ

तेरा बदन खुशबू खुशबू
वो सुवास ले के ज़िंदा हूँ

मुकेश इलाहाबादी -----

Friday, 18 May 2018

कहो तो आप के ये घने गेसू छू देखूं तो

कहो तो  आप के  ये घने गेसू छू देखूं तो
बादल छम- छम कैसे बरसते हैं जानू तो
मुकेश इलाहाबादी -------------------------

Thursday, 17 May 2018

इतिहास खुद को फिर -फिर दोहराता है

इतिहास खुद को फिर -फिर दोहराता है
औरंगज़ेब रूप बदल-बदल कर आता है

जिसके पास धनबल हो और हो बाहुबल
वही सत्ता की कुर्सी बार - बार पाता है

चाँद हो, सूरज हो, बादल हो, समंदर हो
ताकत के आगे हर कोई शीश नवाता है 

चाहे राज लोकतंत्र हो या कि प्रजातंत्र हो 
गरीब व कमज़ोर हर तंत्र में मार खाता है

हैं सच मेहनत ईमानदारी, किताबी बातें
मुकेश इन बातों से पेट कँहा भर पाता है

मुकेश इलाहाबादी -----------------------

Wednesday, 16 May 2018

जादू से, तितली अगर

जानती हो ?
जादू से, तितली अगर
लड़की बन जाती तो
बिलकुल तुम्हारी तरह होती
रंग - बिरंगी - सतरंगी
मुकेश इलाहाबादी -------

तपता हुआ लगे झुलसता हुआ लगे

तपता हुआ लगे झुलसता हुआ लगे
जाने क्यूँ सारा शह्र जलता हुआ लगे

जैसे आफ़ताब ज़मी पे उतर आया हो
फूल भी पत्थर भी पिघलता हुआ लगे

किसी  न  किसी दर्द के मारे हैं सभी
छोटा हो बड़ा हो बिलखता हुआ लगे

सभी के पांवों में लगे हैं पहिये मगर
फिर भी हर शख्श घिसटता हुआ लगे

बहुत चाहा था संवर लूँ खुद को मुकेश
वज़ूद का ज़र्रा ज़र्रा बिखरता हुआ लगे

मुकेश इलाहाबादी ---------------------