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Tuesday, 20 November 2018

काश !

काश !
तुम्हारे जाते ही
क़यामत आ जाए
और - तुम्हारे आते ही
दुनिया फिर से बहाल हो जाए

मुकेश इलाहाबादी ----------

Monday, 19 November 2018

स्त्री होना आसान नहीं है

स्त्री
होना आसान नहीं है
स्त्री होने के लिए
धरती सा धैर्य
जल सी तरलता
हवा के स्पर्श सी मादकता
आकाश सी विशालता
और अग्नि सा तेज़ चाहि होता है
जिस दिन पुरुष थोड़ा थोड़ा स्त्री होना सीख लेगा
उस दिन धरती नरक नहीं स्वर्ग कहलाएगी

मुकेश इलाहाबादी ------------------

आप की तस्वीर डाउनलोड करूंगा

सुना
है, ऐसा सॉफ्टवेयर आने वाला है
जो किसी भी व्यक्ति की तस्वीर को
डाउनलोड करने से उस व्यक्ति का क्लोन डाउन लोड हो सकेगा
आप उससे सच्ची मुच्ची के व्यक्ति की तरह बात कर सकोगे
हंस सकोगे लड़ सकोगे
सच -
उस दिन सब से पहले आप की तस्वीर डाउनलोड करूंगा
और खूब बातें करूंगा

मुकेश इलाहाबादी ---

Thursday, 15 November 2018

अदृश्य नदी बह रही थी

एक
अदृश्य नदी बह रही थी
हमारे - तुम्हारे दरम्यान

इस तरफ मै था
उस तरफ तुम थी
और तुम्हारा गाँव

एक दिन मैंने इस नदी को पार कर
तुम तक
और तुम्हारे गाँव आने के लिए नदी में उतरा

मेरे उतरते ही
नदी अदृश्य हो गयी
साथ ही अदृश्य हो गईं तुम और तुम्हरा गाँव भी

नदी की जगह उग आया एक अंतहीन रेगिस्तान
जिसपे मै बहुत देर तक औंचक खड़ा रहा
सोचता रहा तुम्हारे और तुम्हारे गाँव के बारे में

फिर मै - दौड़ने लगा
यह सोच कर
शायद वह अदृश्य नदी राह बदलते - बदलते
इस रेगिस्तान के पार चली गयी हो
साथ ही तुम व तुम्हारा गाँव भी रेगिस्तान के पार चला गया हो

तब से दौड़ रहा हूँ मै बेतहासा
लगातार
बिना कुछ सोचे - बिना कुछ समझे
यहाँ तक कि अब तो मै थकने भी लगा हूँ
हांफने भी लगा हूँ बुरी तरह
मेरे कदम लड़खड़ा रहे हैं - बुरी तरह
मै गिरने - गिरने को हूँ
फिर भी - दौड़ रहा हूँ - इस उम्मीद में

शायद किसी दिन इस रेगिस्तान के पार
पहुँच ही जाऊँ - मै तुम तक - और - तुम्हारे गाँव तक

मुकेश इलाहाबादी ---------------------------------

आसान नहीं है - पत्थर होना भी

इतना
आसान नहीं है - पत्थर होना भी

पत्थर होने के लिए
अपने जिस्म को कठोर और
इतना कठोर बनाना पड़ता है
कि धूप , हवा , पानी
और आंधी तूफ़ान भी कुछ न बिगाड़ पाए
सदियों सदियों तक

और खुद को इतना निर्विकार बना ले कि
पैरों तले रौंदा जाए
या देवता बना के पूजा जाए
फिर भी उसकी सेहत पे कोइ फर्क न पड़े

बारूद और हथौड़े से तोड़े जाने पे भी प्रतिवाद न करे
और कभी सड़क तो कभी रोड़ी बन के काम में आये

और चुप रहे

इसी लिए कहता हूँ ,
किसी को पत्थर दिल कहने के पहले - कई बार सोच लेना
कंही तुम - पत्थर की तौहीनी तो नहीं कर रहे हो ??

क्यूँकि पत्थर होना भी इतना आसान नहीं होता

मुकेश इलाहाबादी --------------------------

Tuesday, 13 November 2018

घर खो गया है

कई
साल हुए मेरा घर खो गया है
आधी कच्ची
आधी पक्की दीवारों का
खपरैल वाला घर
बुरादे वाले वाली अंगीठी
कच्ची मिट्टी के चूल्हे वाला घर
पिता की धनक
माँ की महक
भाई बहनो की चहक
मामा - मामी , बुआ - फूफा
ताई - ताऊ - मौसी मौसा
तमाम रिश्तेदारों की आवाजाही से
भरापूरा घर
दादा जी की छड़ी
दादी की पूजा की थाली और तुलसी की माला
पिताजी जी की पुरानी हिन्द साइकिल
माता जी का वो भूरा शॉल
(जिसे वो सालोँ साल नया वाला शॉल कहती थीं )
दुछत्ती पे छुपा के
रखी रहती थी लूटी हुई पतंगे - चरखी
आँगन के कोने में
बहन का घरौंदा
छोटे - छोटे खिलौनों वाली गृहस्थी
पड़ोसियों की बेलाग आवाजाही
तमाम अभावों और कमियों के बीच भी
वो कच्ची दीवारों का
पक्का माकन कहीं खो गया है
हमारा
कई साल पहले
मुकेश इलाहाबादी --------------------

Monday, 12 November 2018

आसमाँ पे घर बसाया नहीं जा सकता

आसमाँ पे घर बसाया नहीं जा सकता 
और ज़मी पे अब रहा नहीं जा सकता

हालात इतने बदतर हो गए हैं शहर के 
कब कहाँ क्या हो कहा नहीं जा सकता

बेहतर है घर में रहो, तेज़ाबी बारिश है 
छाते,बरसाती से बचा नहीं जा सकता

ये बस्ती नक्कार खाने में बदल चुकी है 
कुछ, भी सुना सुनाया नहीं जा सकता

हर कोई तो यहाँ पे राजा है बादशाह है 
किसी को कुछ कहा नहीं जा सकता

मुकेश इलाहाबादी ---------------