प्रेम से लबालब कविता का भाव हो तुम
प्रेम से लबालब कविता का भाव हो तुम रस हो तुम ओर 'मै' शब्दों के बीच का खालीपन इस खालीपन भर सकती है न तो धूप न हवा न पानी न वेद की ऋचाएँ न कोई शुक्ति वाक्य इस रिक्त स्थान को भर सकती हैं तो, बस तुम्हारी खिलखिलाती हँसी और मेरे प्रति तुम्हारे 'प्रेम' की स्वीकृति मुकेश इलाहाबादी ------