अधूरी प्रेम कहानियों का बूढ़ा संग्रहालय
अधूरी प्रेम कहानियों का बूढ़ा संग्रहालय जब तक किसी पुराने शहर की किसी तंग गली में एक बूढ़ा संग्रहालय अधूरी प्रेम कहानियों का चुपचाप खुला है तब तक मोहब्बत कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती दोस्तों! वह संग्रहालय जिसकी दीवारों पर कोई पेंटिंग नहीं टंगी, पर हर ईंट में किसी का “कह न सका” धीरे-धीरे साँस लेता है। दरवाज़ा हल्का-सा चरमराता है जैसे पूछ रहा हो “पक्का आना चाहते हो अंदर?” और जो भी हिम्मत करके दाखिल होता है, वह थोड़ा-सा अपना अतीत बाहर ही छोड़ देता है। अंदर शीशे के बक्सों में रखी हैं कुछ अधूरी चिट्ठियाँ, जिनमें “प्रिय” के बाद शब्द काँपते रह गए, कुछ सूखे हुए फूल, जो कभी किताबों में दबे थे, कुछ टिकट के टुकड़े, जिन पर साथ बैठने का सपना अकेले उतर गया। एक कोने में एक पुराना रेडियो रखा है जिसमें अब भी वही गाना अटका है जो किसी ने किसी के लिए कभी भेजा था। यहाँ हर कहानी पूरी नहीं होती बस रुक जाती है कहीं किसी “अगर” पर, किसी “क्यों” पर, या किसी “चलो छोड़ो” पर। इस संग्रहालय का कोई गाइड नहीं हर आने वाला खुद ही अपनी कहानी पहचान लेता है। कभी कोई बूढ़ा आदमी आता है धीरे-धीरे चलता हुआ, किसी एक बक्से ...