आत्मा का ऑफ़लाइन होना”
आत्मा का ऑफ़लाइन होना”
एक रात
अचानक
सारे नेटवर्क
चले गए।
न इंटरनेट,
न डेटा,
न कोई कनेक्शन।
लोग
घबराने लगे
जैसे
उनकी साँस
रुक गई हो।
पर उसी सन्नाटे में
कुछ और
धीरे-धीरे जागा।
वह
आत्मा थी
जो
सालों से
ऑफ़लाइन पड़ी थी।
उसने
धीरे से पूछा
“क्या अब
तुम मुझे सुन सकते हो?”
कोई जवाब नहीं आया
क्योंकि
लोग
अब भी
नेटवर्क ढूँढ रहे थे।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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