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Tuesday, 31 March 2026

अधूरी प्रेम कहानियों का बूढ़ा संग्रहालय

 अधूरी प्रेम कहानियों का बूढ़ा संग्रहालय 


जब तक

किसी पुराने शहर की

किसी तंग गली में

एक बूढ़ा संग्रहालय

अधूरी प्रेम कहानियों का

चुपचाप खुला है

तब तक

मोहब्बत कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती दोस्तों!


वह संग्रहालय

जिसकी दीवारों पर

कोई पेंटिंग नहीं टंगी,

पर हर ईंट में

किसी का “कह न सका”

धीरे-धीरे साँस लेता है।


दरवाज़ा

हल्का-सा चरमराता है

जैसे पूछ रहा हो

“पक्का आना चाहते हो अंदर?”


और जो भी

हिम्मत करके दाखिल होता है,

वह

थोड़ा-सा अपना अतीत

बाहर ही छोड़ देता है।


अंदर

शीशे के बक्सों में रखी हैं


कुछ अधूरी चिट्ठियाँ,

जिनमें “प्रिय” के बाद

शब्द काँपते रह गए,


कुछ सूखे हुए फूल,

जो कभी किताबों में दबे थे,


कुछ टिकट के टुकड़े,

जिन पर साथ बैठने का सपना

अकेले उतर गया।


एक कोने में

एक पुराना रेडियो रखा है

जिसमें

अब भी वही गाना अटका है

जो

किसी ने किसी के लिए

कभी भेजा था।


यहाँ

हर कहानी पूरी नहीं होती

बस

रुक जाती है कहीं


किसी “अगर” पर,

किसी “क्यों” पर,

या

किसी “चलो छोड़ो” पर।


इस संग्रहालय का

कोई गाइड नहीं

हर आने वाला

खुद ही

अपनी कहानी पहचान लेता है।


कभी

कोई बूढ़ा आदमी आता है

धीरे-धीरे चलता हुआ,

किसी एक बक्से के सामने

लंबे समय तक खड़ा रहता है


और फिर

हल्का-सा मुस्कुरा कर

आँखें पोंछ लेता है।


कभी

कोई अधेड़ स्त्री आती है

एक चिट्ठी को

बस दूर से देखती है

छूती नहीं


जैसे

छू लिया तो

सालों से संभाली हुई

शांति टूट जाएगी।


यहाँ

रोना मना नहीं है,

हँसना भी नहीं


बस

ज़्यादा देर ठहरना

थोड़ा खतरनाक है।


मैंने एक दिन

उस बूढ़े संग्रहालय से पूछा

"तुम बंद क्यों नहीं हो जाते?"


वह बोला

"कहानियाँ पूरी हो जातीं

तो शायद बंद हो जाता…"


और इस जवाब में

इतनी सच्चाई थी

कि मेरे पास

कोई सवाल नहीं बचा।


मैं जानता हूँ

यह कविता

किसी न किसी को

इस दरवाज़े तक ले आएगी


वह अंदर जाएगा,

कुछ पहचानेगा,

कुछ छुपाएगा,

और

चुपचाप बाहर आ जाएगा।


जाने क्यों मन करता है

दुनिया के हर सफल प्रेम के सामने

इस संग्रहालय को खड़ा कर दूँ

और कहूँ


देखो!

जो पूरा नहीं हुआ,

वही सबसे ज़्यादा बचा रहा


जो मिल गया,

वह शायद

इतना याद नहीं रहा।


अरे ओ

अधूरी प्रेम कहानियों के

बूढ़े संग्रहालय!

तुम्हारी ये खामोशियाँ

कितनी बोलती हैं…


आओ,

आज

तुम्हारी किसी शेल्फ पर

अपनी भी

एक अधूरी कहानी रख दूँ


ताकि

थोड़ी-सी मोहब्बत

और बची रहे यार!


मुकेश ,,,,,,

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