मृत्यु की प्रतीक्षा में ‘मैं’ का विघटन: Malone Dies का दार्शनिक अध्ययन
मृत्यु की प्रतीक्षा में ‘मैं’ का विघटन: Malone Dies का दार्शनिक अध्ययन सैमुअल बेकट 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली आधुनिकतावादी (modernist) और उत्तर-आधुनिक (postmodern) लेखकों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 1906 में आयरलैंड में हुआ और उन्होंने मुख्यतः अंग्रेज़ी तथा फ़्रेंच दोनों भाषाओं में लेखन किया। वे अपने नाटक Waiting for Godot के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हुए, जिसमें “प्रतीक्षा” को जीवन का रूपक बना दिया गया। 1969 में उन्हें Nobel Prize in Literature मिला। उनकी रचनाओं की विशेषता है— न्यूनतम भाषा (minimalism) अस्तित्व की निरर्थकता मौन, शून्यता और विखंडन Malone Dies : संक्षिप्त सार यह उपन्यास एक बूढ़े व्यक्ति मैलोन के अंतिम समय का आंतरिक वृत्तांत है। वह बिस्तर पर पड़ा है और मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहा है। बाहरी दुनिया लगभग समाप्त हो चुकी है—अब केवल उसकी चेतना बची है। समय बिताने के लिए वह कहानियाँ गढ़ता है— कुछ पात्रों (जैसे सैपो या मैक्मैन) के माध्यम से, पर ये कहानियाँ कभी पूर्ण नहीं होतीं। धीरे-धीरे: उसकी स्मृति टूटती है भाषा बिखरती है “मैं” (self) अस्थिर हो जाता है अंत में, उपन्यास क...