झरने की हँसी में छुपी उदासी

 झरने की हँसी में छुपी उदासी


एक झरना गिरता है पहाड़ से,

जैसे कोई वाक्य टूटकर गिर रहा हो।


उसकी आवाज़ में

बहुत शोर है,

पर भीतर एक ख़ामोशी है

जो किसी ने सुनी नहीं।


लोग उसे सुंदर कहते हैं,

पर कोई नहीं पूछता

कि इतना पानी

कितने टूटे हुए क्षणों का जोड़ है।


हर बूंद में

किसी अधूरी कहानी का स्वाद है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,,

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