इबारतें जो बह जाती हैं
कुछ शब्द ऐसे होते हैं
जो काग़ज़ पर नहीं लिखे जाते,
वे उंगलियों से टपकते हैं
और पानी में गिरते ही
अपनी शक्ल खो देते हैं।
लेकिन अजीब बात यह है—
खोने के बाद भी वे मिटते नहीं।
वे बहते रहते हैं
किसी नदी की नसों में
जैसे यादें खून में घूमती हैं।
ज़िंदगी भी तो कुछ ऐसी ही है
जो लिखा नहीं जाता,
वही सबसे गहरा होता है।
मुकेश ,,,,,,,
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