तेज़ बहाव और भूलने की कला
नदी जब तेज़ होती है
तो वह चीज़ों को बहा नहीं ले जाती—
वह उन्हें बदल देती है।
चेहरे, नाम, वादे
सब धुंधले होकर
एक ही रंग में मिल जाते हैं।
यह वही जगह है
जहाँ स्मृतियाँ
अपना अर्थ खो देती हैं
और फिर भी
अपनी मौजूदगी बचाए रखती हैं।
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